अविपत्तिकर चूर्ण – हाइपर एसिडिटी एवं अजीर्ण रोग में आयुर्वेद पद्धति का सबसे विश्वनीय चूर्ण है | अधीक अम्लीय पदार्थो के सेवन एवं आहार में अम्लता की अधिकता के कारण शरीर में हाइपर एसिडिटी जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है | हाइपर एसिडिटी के कारण सीने में जलन, कब्ज, अजीर्ण एवं अपच जैसे रोगों से व्यक्ति पीड़ित हो जाता है |

भूख की कमी, भोजन ठीक ढंग से न पचना, सीने में जलन एवं कब्ज जैसे रोगों में अविपत्तिकर चूर्ण के सेवन से जल्द ही आराम मिल जाता है |

 

सेवन कैसे करें ?

अविपत्तिकर चूर्ण लेने का सही समय खाना खाने से पहले सुबह एवं शाम करना चाहिए | इसे 3 से 6 ग्राम की मात्रा में गरम जल , शहद या दूध के साथ लेना चाहिए | सेवन से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए |

अविपत्तिकर चूर्ण के फायदे या चिकित्सकीय उपयोग 

  • हाइपर एसिडिटी या अम्लपित की समस्या में इसका सेवन लाभदायक होता है |
  • भूख की कमी
  • अजीर्ण एवं अपच
  • कब्ज में अविपत्तिकर चूर्ण के प्रयोग से लाभ मिलता है |
  • यह शरीर में बढे हुए पित्त को संतुलित करके पाचन को सुधारने का कार्य करता है |
  • गैस के कारण होने वाले दर्द  से आराम मिलता है |
  • सीने की जलन में यह चमत्कारिक – नुकसान रहित आयुर्वेदिक औषधि है |
  • खट्टी डकारों से राहत मिलती है |
  • मूत्र विकारों में भी लाभदायक है |

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