‌‌‌औषधीय गुण: गोखरू शरीर में ताकत देने वाला, नाभि के नीचे के भाग की सूजन को कम करने वाला, वीर्य की वृद्धि करने वाला, रसायन, भूख को तेज करने वाला होता है। यह स्वादिष्ट होता है। यह पेशाब से सम्बंधित परेशानी तथा पेशाब करने पर होने वाले जलन को दूर करने वाला, पथरी को नष्ट करने वाला, जलन को शान्त करने वाला, प्रमेह (वीर्य विकार), श्वांस, खांसी, हृदय रोग, बवासीर तथा त्रिदोष (वात, कफ और पित्त) को नष्ट करने वाला होता है। इसके सेवन से पेशाब खुलकर आता है और यह पथरी को भी गला देता है। गोखरू स्वभाव को कोमल बनाता है तथा यह मासिकधर्म को चालू करता है।

गोखरू सभी प्रकार के गुर्दें के रोगों को ठीक करने में प्रभावशाली औषधि है। यह औषधि मूत्र की मात्रा को बढ़ाकर पथरी को कुछ ही हफ्तों में टुकड़े-टुकड़े करके बाहर निकाल देती है।

आयुर्वेदिक मतानुसार: गोखरू स्वाद में मीठा, चिकना, ठण्डा तथा भारी होता है। यह वात-पित्त को नष्ट करता है। यह पेट के कई रोगों को ठीक करने वाला होता है। इसके सेवन से लिंग में उत्तेजना पैदा होती है। यह दर्द को नष्ट करता है। सूजाक-प्रमेह, श्वास, खांसी, बवासीर आदि रोग भी इसके सेवन से ठीक हो सकते हैं। यह गर्भाशय को शुद्ध करने वाला, बांझपन को दूर करने वाला, प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन दूर करने वाला एवं हृदय रोग को ठीक करने वाला होता है।

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