गुण व उपयोग: इसके सेवन से प्रसूत विकारों, हृदय रोग, दिमागी कमजोरी, शोथ रोग, गुल्म, उदर रोग, मानसिक अशान्ति, अनिद्रा, हृदय की कमजोरी आदि में उत्तम लाभ मिलता है। किन्ही कारणों से हृदय में लगने वाले झटकों में व मंद-मंद दर्द में यह विशेष लाभकारी है। ऐसी स्थिती में अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ इसका सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है।

मात्रा व अनुपान: 10 ग्राम से 100 ग्राम, दिन में चार बार अकेले ही या वातनाशक औषधीयों के अनुसार रूप में दें।

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