गुण व उपयोग: इसके सेवन से प्रमेह, कामला, पेट फूला हुआ रहना, मधुमेह, स्वप्नदोष, आमवात, मेदावृद्धि, शरीर से पसीना निकलना तथा पसीने से दुगन्ध आना, पांडुरोग, वातरोग, वातरक्त, खाज-खुजली, पामा, कुष्ठ, कब्ज आदि रोगों में विशेष लाभ मिलता है।

मात्रा व अनुपान: 20 से 80 ग्राम, दिन-रात में 3 से 4 बार आवश्यकतानुसार दें।

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