गुण व उपयोग: अर्क के सेवन से रक्त दोष, चर्म विकार, खाज-खुजली, फोड़ा-फुंसी, विचर्चिका, दद्रु, कुष्ठ, विसर्प, विस्फोटक, जीर्ण उपदंश जन्य रक्तविकार एवं जीर्ण पूयमेह (सूजाक) जन्य विकार, गठिया, वातरक्त आदि रोगों में अच्छा लाभ मिलता है। यह रक्त को शुद्ध करता है।

मात्रा व अनुपान: 20 से 40 ग्राम, दिन में 2 - 3 बार।

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