गुण व उपयोग: च्यवनप्राशावलेह शरीर को बल व स्फूर्ति प्रदान करने वाला है। यह बल, वीर्य, कान्ति व बुद्धि को बढ़ाता है। यह वीर्यविकार, स्वप्नदोष, राजयक्ष्मा, खाँसी, श्वास, प्यास, वातरक्त, छाती का जकड़ना, वातरोग, पित्तरोग, शुक्रदोष व मूत्रदोष में उत्तम लाभ देता है। यह फेफड़े मजबूत करता है, दिल को ताकत देता है, पुरानी खाँसी व दमा में लाभ करता है। इसके सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। यह वृद्धि व स्मरण-शक्तिवर्द्धक एवं मैथुन में आनन्द देने वाला है। रोग के पश्चात् की दुर्बलता दूर करता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ‘सी’ होता है। स्त्रियों के गर्भाशय व पुरूषों के वीर्य-दोष को मिटा कर उनको सन्तान सुख देने योग्य बनाता है।

मात्रा व अनुपान: 10 से 20 ग्राम, दिन में दो बार दूध के साथ।

Write a review

Your Name:

Your Review:

Note: HTML is not translated!

Rating: Bad Good

Enter the code in the box below:

Custom Tab Here